गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

HAI PYAR;;;;;;;;;;;;;;

क्या वाकई प्यार र र र है ;;;;;;;;;;

प्यार कितना खुबसूरत शब्द है बहुत  प्यारा एहसास पर आज इसके मायने ही बदल गए है क्या  प्यार  भी एक पर्व की ही तरह रह गया हैजो क़िसी खास  गिफ्ट दिन तक सीमित है अगर हर दिन प्यार भरा हो तो कैसा हो हम जिसको प्यार करते है उसकी भी उपेछा करने से पीछे नहीं हटते जितनी इज्जज्त -ए -अफ़जाई अपने लिए  चाहते है क्या कभी देने की सोचते है प्यार बहुत दूर हो जाता जब आप किसी के अच्छे  दोस्त तक नहीं बन पाते कहते है सफल प्रेम के लिए आप  उससे जितने दूर रहेंगे उतना प्रेम में रहेंगे सही भी है क्योकि पास होने पर आपको क़द्र नहीं होती उसकी प्यार के नाम से जहन में सिर्फ प्रेमी प्रेमिका का ही ख्याल आता है पर इनके अलवा भी प्यार तो सब के लिए है अगर आपको कह दिया जाये की आप उस व्यक्ति के पास जाये जिससे  आप प्रेम करते है और उसके सामने प्रेम का इजहार करे वो व्यक्ति जिसका कभी आपने दिल दुखाया हो जिससे कभी न कहा हो ये कोई भी हो सकता है आपके परेंट्स, भाई बहन,रिश्तेदार हो यह काम मुश्किल  नहीं जब तक आप  इसपर ध्यान नहीं देते पर इसके विपरीत प्रेम का इजहार करना 
किसी  भयावह काम  से कम नहीं
खैर आज की दुनिया में तो हर तरफ लोग जंग के लिए तैयार रहते है उपेछा के लिए खड़े है मारने  से लेकर मरने के लिए खड़े रहते है जलाने के लिए कुछ नहीं मगर नफ़रत तो है दिलों में हमें उसे ही तो खत्म करना होगा क्यों न कोशिश अपने ही शुरू हो दोस्तों रिश्ता चाहे कोई भी क्यों न हो दोस्ती का हो या' 'प्यार' का हो आप उसमे कभी भी 'स्वार्थी 'ना बने जीवन भर आप प्रेम में रहेंगे सफल रिश्ता होगा ..............




दिलों में मोहब्बत बसा देखिये
फिर इस जिंदगी का मज़ा देखिये
ज़रा शौक़ करके  वफ़ा देखिये
फिर इस जिंदगी का मज़ा देखिये ..................................

रविवार, 25 मार्च 2012

जिंदगी जिसकी आग में  जलती है कामयाबी  उसीको  मिलती है :अर्चना गुप्ता

छोटे से शहर बलिया की अर्चना गुप्ता मध्यमवर्गी परिवार से होते हुए भी पत्रकार बनने का फैसला किया और उसे  साकार करने का बुलंद हौसला रखती  है वो  रुढ़िवादी सोच को मिटा देना चाहती है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश :

आपका बचपन कैसा बीता ?

बचपन को इतना एन्जॉय नहीं किया क्योंकि हमारे यहाँ लड़कियों पर पाबंदी थी सिर्फ जिया है बचपन को.

तो क्या  आपके माता-पिता रुढ़िवादी है?

नहीं रुढ़िवादी तो कहना गलत होगा पर उस समय वो रुढ़िवादी सोच के दवाब में थे शायद  इसलिए उन्होंने मुझपर पाबन्दी की हो.

कैसे रही आपकी  शुरूआती शिक्षा ?

बचपन से ही मुझे पढने का शौक था शुरूआती शिक्षा एक सरकारी स्कूल में हुई कुछ आर्थिक सामाजिक समस्या के कारण मै अपनी शुरुआती  शिक्षा को मजबूत नहीं बना पाई फिर भी मैंने मेहनत किया और आगे बढ़ी बदलते वक़्त के साथ मुझे भी थोड़ी आज़ादी मिली और  फिर मैंनेअपनी आगे की पढाई एक अच्छे कॉलेज से की

आपने  मास कॉम करने के लिए ही क्यों  सोचा ?

मुझे बलिया से बाहरनिकलना था कुछ कर के दिखाना था 

वो तो दूसरे  प्रोफसंन में भी जाकर भी बहार निकल सकती थी ?

मुझे पावर चाहिए था और मेरी रूचि थी इसमें  .

पावर ही क्यों ?

no comments .

बलिया में रहने के बावजूद भी आपको इस कोर्स के बारे में पता कैसे चला ?

news chhanels   देखकर ,अखबार पढ़कर लोगो से मिली जानकारी

यह तक पहुचने के लिए आपने अपने परेंट्स को राजी कैसे किया ?

मैंने उन्हें भरोसा दिलाया और कह की बदलते वक़्त के साथ उन्हें भी बदलना चाहिए और फिर उन्होंने ही मेरा साथ दिया  जिसकी  वज़ह से आज में यहाँ पर हूँ 

लखनऊ आने के बाद क्या आपको नये लोगो के साथ मिलने जुलने, रहने बातचीत करने में प्रोब्लम हुई ?

हा बहुत प्रोब्लम हुई सब से  पहले तो मुझे भाषा की प्रोब्लम महसूस हुई क्यों की मेरी भाषा भोजपुरी थी मुझे लोगो के साथ घुलने मिलने प्रोब्लम हुई ..

 फिर कैसे आपने अपने आपको बदला ?

 समय के परिस्तिथि के साथ आपको बदलना पड़ता औरऔर मैंने कोशिश की मुझमे एक pluspoint है की हर परस्तिथि को जी लेती हूँ मैंने लोगो से घुलना मिलना शुरू किया फ्रंड्स बनाये मुझे ladko से बोलने में प्रॉब्लम थी मैंने बातचीत करना शूरू किया अपने काम खुद करना शुरू किया  जानकारिया प्राप्त  की 

आपने कहा आपको भाषा की प्रोब्लम थी तो की तो क्या आपको अपनी पढाई में प्रोब्लम महसूस हुई?

 मुझे इंग्लिश पढने में  प्रोब्लम है होती है क्यों की मेरा backround हिंदी से है फिर भी मै पढने की कोशिश करती हूँ और अपने फ्रान्ज़ की मदद लेती हूँ 

लाइफ का ऐसा यादगार पल जो आपको सबसे अधिक ख़ुशी देता है ?

मेरी लाइफ का सबसे खुशियों भरा पल था जब मेरे परेंट्स ने मुझे अपने शहर  से बाहर आने दिया और मौका दिया आगे बढे अपने सपनो को पंख लगाने का इसके लिए मै अपने परेंट्स की तह दिल से शुक्र गुजार  हूँयेमेरी लाइफ का सब से यादगार पल रहेगा

kismat को मानती है aap?

खुद पे अधिक विशवस है मेरा मानना है की अगर खुद पे yakeen करते है तो सब कुछ हासिल कर सकते है kismat कुछ भी मायने नहीं रखती है aap हार केलिए  कभी किस्मतको  दोष  नहीं दे सकते है

पर कभी कभी तो kismat साथ देती है ?

शायद

क्या करना चाहती है  जिंदगी में आगे?

पत्रकार बननाऔर समाज का विकास करना

पत्रकार बनकर aap समाज का विकास कैसे कर  सकती है ?

पर  कोशिश तो कर ही सकती हूँ और मै पूरी कोशिश करुँगी .

पत्रकार  से याद आया आपको लिखने का शौक है ?

हा लिखती हूपर अभी तक सामने नहीं ला पाई हूँ क्योंकि अभी मैंने लिखना शुरू किया थोड़ी  सी प्रोब्लम आती है बहुत जल्द सामने होगा

आपके के लिए  लाइफ क्या है

 मेरे लिए लाइफ में  सफल होना बहुत मायने रखता  है मै हर पल जीना चाहती हूँ महसूस करना चाहती हूँ बस जीने का नाम जिंदगी है

आपका शौक क्या  क्या  है ?

मेरा  शौक है  पढना कुकिंग करना, घूमना .

आपके आदर्श कौन है ?

मेरे आदर्श मेरे माता पिता है उनसे बढकर मेर लिए कोई नहीं है

जिस प्रोफेशन को aap ने चुना है कई लोगो का कहना है इस प्रोफसंन में लड़कियों  को कम्  तब्बजो मिलती है इस बारे  आपका क्या कहना है ?

देखिये जब तक aap खुद अनुभव नहीं करते तबतक इस प्रोफसंन  को गलत न कह सकते है लोगो का  क्या कहना मुझे इससे कोई  मतलब नहीं है आजकल लड़कियों को हर फ़ील्ड में तब्ब्जों मिलती है ........

 आपकी ताक़त क्या है?

मेरी ताक़त मेरा विस्श्वाश है मै आशावादी हूँ बहुत जल्द मै निराश  नहीं होती कहना का मतलब है हार नहीं मानती परिस्तिथ्यों से ...........

परिवार में सबसे करीब किसके है aap ?

माँ के .

हालही में आपके कॉलेज में workshop हुई आपका अनुभव कैसा रहा?

बहुत ही बढ़िया  बहुत कुछ सीखने को मिला ये मेरा पहला अनुभव रहा है

                                                                                                                parulverma.


                                       

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

chahat

दिलों में अपनी चाहतों को साथ ले कर चलों
है कितना खुबसूरत हर पल मजा ले कर चलों
                                                                      
मुश्किलें हों  लाख सफर में मगर गुजकर कर
निकलना है  हमें ये जज्बा साथ ले कर चलों 

चाहतों से    नही   करना    समझौता हमें  
हमेशा ये जिद अपने साथ ले कर चलों 

गिर  कर ही  तो फिर सम्हलना  है हमें     
 ये हौसला साथ ले ले कर चलों

अपनी एक अलग पहचान  बनानी होगी
ये विश्वास से भरी उम्मीद साथ ले कर चलों

जो बीत गया बुरे स्वप्न की तरह  भुलाकर  
उसे ज़माने के साथ कदम मिलाकर  चलों

फिर मिलेगी अपनी चाहत की मंजिल हमें 
एक दिन ये अटूट विश्वास साथ ले कर चलों

दिलों में अपनी चाहतों  को साथ ले कर चलों ............................